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प्रस्तुत कहानी संग्रह 'आकाश-दीप' में कहानी की संरचना केन्द्रीभूत नहीं है बल्कि बुनावट की दृष्टि से भावकेन्द्रित है और वह भाव है चंपा की 'मानसिक स्थिति' का संकेत जो सारे कथ्य को लोककथा की तरह संकेन्द्रित करती है-परन्ततु, लोककथाओं की तरह मुक्त नहीं करती है, बल्कि चिंतित और व्याकुल करती है । यही वह अंतर है जो प्रसाद के योगदान को महत्त्वपूर्ण बना देता है । 'आकाश-दीप' संग्रह में 'प्रतिध्वनि' की तुलना में न केवल मानव-मन की पर्तों के उद्घाटन और अंधेरों की पहचान में सफल है बल्कि सामाजिक सच्चाई को अधिक सटीक ढंग से संकेतित करने में भी सफल है । इस संग्रह में संकलित 'आकाश-दीप', 'पुरस्कार', 'ममता', 'अपराधी', 'स्वर्ग के खंडहर', 'बनजारा' कहानियाँ अपने में निष्कर्षात्मक नहीं है परन्तु जिस प्रकार की विकल्पहीनता और भावसंघर्ष को व्यक्त करती हैं वह उस युग के भारतीय मध्यवर्ग की सृजनात्मक अभिव्यक्ति है ।.
9789383522286
in stock INR 240
Rajkamal Prakashan
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प्रस्तुत कहानी संग्रह 'आकाश-दीप' में कहानी की संरचना केन्द्रीभूत नहीं है बल्कि बुनावट की दृष्टि से भावकेन्द्रित है और वह भाव है चंपा की 'मानसिक स्थिति' का संकेत जो सारे कथ्य को लोककथा की तरह संकेन्द्रित करती है-परन्ततु, लोककथाओं की तरह मुक्त नहीं करती है, बल्कि चिंतित और व्याकुल करती है । यही वह अंतर है जो प्रसाद के योगदान को महत्त्वपूर्ण बना देता है । 'आकाश-दीप' संग्रह में 'प्रतिध्वनि' की तुलना में न केवल मानव-मन की पर्तों के उद्घाटन और अंधेरों की पहचान में सफल है बल्कि सामाजिक सच्चाई को अधिक सटीक ढंग से संकेतित करने में भी सफल है । इस संग्रह में संकलित 'आकाश-दीप', 'पुरस्कार', 'ममता', 'अपराधी', 'स्वर्ग के खंडहर', 'बनजारा' कहानियाँ अपने में निष्कर्षात्मक नहीं है परन्तु जिस प्रकार की विकल्पहीनता और भावसंघर्ष को व्यक्त करती हैं वह उस युग के भारतीय मध्यवर्ग की सृजनात्मक अभिव्यक्ति है ।.
Author Jaishankar Prasad
Language Hindi
Publisher Lokbharti Prakashan
Isbn 13 9789383522286
Pages 104
Binding Hardcover
Stock TRUE
Brand Rajkamal Prakashan