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9789388211277 6422c08ed6b8b60283321a1a Agnigarbh : Hindi Ki Vigyan Katha-Kavitayen https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422c090d6b8b60283321a46/book-rajkamal-prakashan-9789388211277-18719333056678.jpg विज्ञान कथा-कविता का सरल मतलब है विज्ञान+कथा+कविता | क्लासिक परिभाषा के अनुसार इसी कविता के दो तत्त्व हैं-विज्ञानन और कथा, यानी नैरेशन, जो भविष्योन्मुखी है | अन्य विद्वानों का मत है कि वैज्ञानिक थीम्स को काल्पनिक प्रसंगों में प्रयुक्त करनेवाली कविता, विज्ञान कथा-कविता है | मुख्य धारा की कविता जो व्यक्तिगत जीवन एवं अनुभव पर ज्यादा आधारित है, विज्ञान कथा-कविता अनुभव के बजाय कविता से अधिक नाता रखती है | परन्तु अब यह विवाद नहीं रहा | इसमें फन्तासी, हॉरर, स्पेकुलेटिव, बर्हिवेशी कथाएँ आदि से सम्बंधित सभी वर्ण्य विषय शामिल हैं | अग्निगर्भ में मानवीय संवेदना की यथार्थ, विज्ञान और कल्पना से जो भिडंत हुई है, वह इसे उत्कृष्ट कविता बनाती है | अग्निगर्भ के पहले खंड की कविता चश्मदीद तथा दूसरे खंड की लम्बी कविताएँ तथा-प्रेत भूमि, पूर्णिमा की रात, एक और -संजय तथा उड़नतश्तरी विशेष रूप से उल्लिखित हैं | कुल मिलकर यह हेमंत द्विवेदी का अदभुत, अकल्पनीय और आश्चर्यजनक संसार है |. 9789388211277
in stock INR 320
Rajkamal Prakashan
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विज्ञान कथा-कविता का सरल मतलब है विज्ञान+कथा+कविता | क्लासिक परिभाषा के अनुसार इसी कविता के दो तत्त्व हैं-विज्ञानन और कथा, यानी नैरेशन, जो भविष्योन्मुखी है | अन्य विद्वानों का मत है कि वैज्ञानिक थीम्स को काल्पनिक प्रसंगों में प्रयुक्त करनेवाली कविता, विज्ञान कथा-कविता है | मुख्य धारा की कविता जो व्यक्तिगत जीवन एवं अनुभव पर ज्यादा आधारित है, विज्ञान कथा-कविता अनुभव के बजाय कविता से अधिक नाता रखती है | परन्तु अब यह विवाद नहीं रहा | इसमें फन्तासी, हॉरर, स्पेकुलेटिव, बर्हिवेशी कथाएँ आदि से सम्बंधित सभी वर्ण्य विषय शामिल हैं | अग्निगर्भ में मानवीय संवेदना की यथार्थ, विज्ञान और कल्पना से जो भिडंत हुई है, वह इसे उत्कृष्ट कविता बनाती है | अग्निगर्भ के पहले खंड की कविता चश्मदीद तथा दूसरे खंड की लम्बी कविताएँ तथा-प्रेत भूमि, पूर्णिमा की रात, एक और -संजय तथा उड़नतश्तरी विशेष रूप से उल्लिखित हैं | कुल मिलकर यह हेमंत द्विवेदी का अदभुत, अकल्पनीय और आश्चर्यजनक संसार है |.
Author HemantDwivedi
Language Hindi
Publisher Lokbharti Prakashan
Isbn 13 9789388211277
Pages 150
Binding Hardcover
Stock TRUE
Brand Rajkamal Prakashan