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9788171193716 6422bcd6d6b8b60283310ee7 Mahatma Jotiba Phule Rachanawali : Vols. 1-2 https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422bcd7d6b8b60283310f24/book-radhakrishna-prakashan-9788171193716-39592998142147.jpg

यह किताब जोतिबा फुले (जोतिराव गोविन्दराव फुले : 1827-1890) की सम्पूर्ण रचनाओं का संग्रह है। सन् 1855 से सन् 1890 तक उन्होंने जितने ग्रन्थों की रचना कीसभी को इसमें संगृहीत किया गया है। उनकी पहली किताब तृतीय रत्न’ (नाटक) सन् 1855 में और अन्तिम सार्वजनिक सत्यधर्म’ सन् 1891 में उनके परिनिर्वाण के बाद प्रकाशित हुई थी।

जोतिराव फुले की कर्मभूमि महाराष्ट्र रही है। उन्होंने अपनी सारी रचनाएँ जनसाधारण की बोली मराठी में लिखीं। उनका कार्य और रचनाएँ अपने समय में भी विवादास्पद रहीं और आज भी हैं। लेकिन उनका लेखन हर पीढ़ी में सामाजिक क्रान्ति की चेतना जगाता रहेगाइसमें कोई सन्देह नहीं।

उनकी यह रचनावली उनके कार्य और चिन्तन का ऐतिहासिक दस्तावेज़ है।

9788171193716
out of stock INR 1356
Rajkamal Prakashan
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यह किताब जोतिबा फुले (जोतिराव गोविन्दराव फुले : 1827-1890) की सम्पूर्ण रचनाओं का संग्रह है। सन् 1855 से सन् 1890 तक उन्होंने जितने ग्रन्थों की रचना कीसभी को इसमें संगृहीत किया गया है। उनकी पहली किताब तृतीय रत्न’ (नाटक) सन् 1855 में और अन्तिम सार्वजनिक सत्यधर्म’ सन् 1891 में उनके परिनिर्वाण के बाद प्रकाशित हुई थी।

जोतिराव फुले की कर्मभूमि महाराष्ट्र रही है। उन्होंने अपनी सारी रचनाएँ जनसाधारण की बोली मराठी में लिखीं। उनका कार्य और रचनाएँ अपने समय में भी विवादास्पद रहीं और आज भी हैं। लेकिन उनका लेखन हर पीढ़ी में सामाजिक क्रान्ति की चेतना जगाता रहेगाइसमें कोई सन्देह नहीं।

उनकी यह रचनावली उनके कार्य और चिन्तन का ऐतिहासिक दस्तावेज़ है।

Author Mahatma Jotiba Phule
Language Hindi
Publisher Radhakrishna Prakashan
Isbn 13 9788171193716
Pages 695
Binding Hardcover
Brand Rajkamal Prakashan