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Bookish Santa
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9789352210008 6422bc81d6b8b6028330fe21 Panchtantra Ki Kahaniyan https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422bc83d6b8b6028330fea1/book-rajkamal-prakashan-9789352210008-19142948552870.jpg
पंचतंत्र की कहनियों में पांडित्य और हास्यरस का जो अपूर्व समन्वय देखने को मिलता है, उससे ज्ञात होता है कि इसका रचयिता कितना मधुर कथाकार तथा निपुण लेखक था | उसकी तीक्ष्ण बुद्धि राजनीति और कूटनीति की गुत्थियों में जितनी रमती थी, उतनी ही पाठकों तथा श्रोताओं की सहानुभूति, अभिरूचि, कल्पना एवं मनोरंजन की भावना को तुष्ट करने के लिए प्रयत्नशील रहती थी | उसने एक ऐसी कथाशैली का आविष्कार किया, जो आज के युग में भी अनुकरणीय बनी हुई है | उसकी प्रत्येक कहानी स्वयं कहानी के रूप में जितनी मनोहारिणी तथा लोकरंजक है, उतनी ही किसी धर्म-कथा, राजनीति, कूटनीति अथवा सामाजिक हित-चिंता का मनोहर दृष्टान्त उपस्थित करनेवाली भी है |.

9789352210008
in stock INR 180
Rajkamal Prakashan
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पंचतंत्र की कहनियों में पांडित्य और हास्यरस का जो अपूर्व समन्वय देखने को मिलता है, उससे ज्ञात होता है कि इसका रचयिता कितना मधुर कथाकार तथा निपुण लेखक था | उसकी तीक्ष्ण बुद्धि राजनीति और कूटनीति की गुत्थियों में जितनी रमती थी, उतनी ही पाठकों तथा श्रोताओं की सहानुभूति, अभिरूचि, कल्पना एवं मनोरंजन की भावना को तुष्ट करने के लिए प्रयत्नशील रहती थी | उसने एक ऐसी कथाशैली का आविष्कार किया, जो आज के युग में भी अनुकरणीय बनी हुई है | उसकी प्रत्येक कहानी स्वयं कहानी के रूप में जितनी मनोहारिणी तथा लोकरंजक है, उतनी ही किसी धर्म-कथा, राजनीति, कूटनीति अथवा सामाजिक हित-चिंता का मनोहर दृष्टान्त उपस्थित करनेवाली भी है |.

Author Tr.RampratapTripathiShastri
Language Hindi
Publisher Lokbharti Prakashan
Isbn 13 9789352210008
Pages 264
Binding Paperback
Stock TRUE
Brand Rajkamal Prakashan