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9788183618748 6422bc30d6b8b6028330eae1 Patanjali Aur Ayurvedic Yoga https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422bc32d6b8b6028330eb26/book-rajkamal-prakashan-9788183618748-19145105440934.jpg
आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार वात, पित्त और कफ में से किसी एक के असन्तुलन से मानसिक अवस्था में तो परिवर्तन आता है, उससे शरीर के स्तर पर भी अन्य प्रभाव पड़ते हैं। उसी प्रकार पतंजलि में अष्टांग योग के प्रथम तीन अंग है—यम, आत्म अनुशासन और संयम। इनकी उपयोगिता भी त्रिदोषों में संतुलन लाती है।योग और आयुर्वेद दोनों ही मूल रूप से शरीर से सम्बन्धित हैं। इनके आधारभूत सिद्धांत सांख्य पर आधारित हैं। आयुर्वेदिक योग पतंजलि के अष्टांग योग से ही मूलभूत रूप से ग्रहण किया गया है। आयुर्वेदिक योग का आधारभूत उद्देश्य है—अच्छा स्वास्थ्य, शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखना और सुखद जीवन का आनन्द पाना।डॉ. विनोद वर्मा की इस पुस्तक का उद्देश्य योग और आयुर्वेद दोनों की ही शरीर के माध्यम से भली-भांति हृदयंगम करना है। दूसरा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान सागर से ऐसी नई एवं सरल विधियों का विकास करना है जिनसे मानव स्वास्थ्य, शान्ति और सौमनस्य प्राप्त कर सके। इस पुस्तक को पांच खंडों में विभाजित किया गया है। प्रथम खंड में भारतीय परम्परा: योग और आयुर्वेद पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे खंड में पतंजलि के योग सूत्रों की व्याख्या की गई है और तीसरे खंड में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांत तथा चौथे खंड में योग और आयुर्वेद का एकीकरण एवं पांचवें खंड में आयुर्वेद योग पर विस्तृत चर्चा की गई है।

9788183618748
in stock INR 476
Rajkamal Prakashan
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आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार वात, पित्त और कफ में से किसी एक के असन्तुलन से मानसिक अवस्था में तो परिवर्तन आता है, उससे शरीर के स्तर पर भी अन्य प्रभाव पड़ते हैं। उसी प्रकार पतंजलि में अष्टांग योग के प्रथम तीन अंग है—यम, आत्म अनुशासन और संयम। इनकी उपयोगिता भी त्रिदोषों में संतुलन लाती है।योग और आयुर्वेद दोनों ही मूल रूप से शरीर से सम्बन्धित हैं। इनके आधारभूत सिद्धांत सांख्य पर आधारित हैं। आयुर्वेदिक योग पतंजलि के अष्टांग योग से ही मूलभूत रूप से ग्रहण किया गया है। आयुर्वेदिक योग का आधारभूत उद्देश्य है—अच्छा स्वास्थ्य, शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखना और सुखद जीवन का आनन्द पाना।डॉ. विनोद वर्मा की इस पुस्तक का उद्देश्य योग और आयुर्वेद दोनों की ही शरीर के माध्यम से भली-भांति हृदयंगम करना है। दूसरा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान सागर से ऐसी नई एवं सरल विधियों का विकास करना है जिनसे मानव स्वास्थ्य, शान्ति और सौमनस्य प्राप्त कर सके। इस पुस्तक को पांच खंडों में विभाजित किया गया है। प्रथम खंड में भारतीय परम्परा: योग और आयुर्वेद पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे खंड में पतंजलि के योग सूत्रों की व्याख्या की गई है और तीसरे खंड में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांत तथा चौथे खंड में योग और आयुर्वेद का एकीकरण एवं पांचवें खंड में आयुर्वेद योग पर विस्तृत चर्चा की गई है।

Author VinodVerma
Language Hindi
Publisher Radhakrishna Prakashan
Isbn 13 9788183618748
Pages 260
Binding Hardcover
Stock TRUE
Brand Rajkamal Prakashan