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9788171783830 6422bd1ed6b8b60283311cba Pratinidhi Kahaniyan : Phanishwarnath Renu https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422bd20d6b8b60283311cfe/book-rajkamal-prakashan-9788171783830-19164542927014.jpg
प्रेमचंद के बाद हिंदी कथा-साहित्य में रेणु उन थोड़े-से कथाकारों में अग्रगण्य हैं जिन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन का उसके सम्पूर्ण आंतरिक यथार्थ के साथ चित्रण किया है ! स्वाधीनता के बाद भारतीय गाँव ने जिस शहरी रिश्ते को बनाया और निभाना चाहा है, रेणु की नजर उससे होनेवाले सांस्कृतिक विघटन पर भी है जिसे उन्होंने गहरी तकलीफ के साथ उकेरा है ! मूल्य-स्तर पर उससे उनकी आंचलिकता अतिक्रमित हुई है और उसका एक जातीय स्वरुप उभरा है ! वस्तुतः ग्रामीण जन-जीवन के सन्दर्भ में रेणु की कहानियां अकुंठ मानवीयता, गहन रागात्मकता और अनोखी रसमयता से परिपूर्ण हैं ! यही करण है कि उनमे एक सहज सम्मोहन और पाठकीय संवेदना को परितृप्त करने की अपूर्व क्षमता है ! मानव-जीवन की पीड़ा अरु अवसाद, आनंद और उल्लास को एक कलात्मक लय-ताल सौंपना किसी रचनाकार के लिए अपने प्राणों का रस उंडेलकर ही संभव है और रेणु ऐसे ही रचनाकार हैं ! इस संग्रह में उनकी प्रायः सभी महत्त्पूर्ण कहानियाँ संकलित हैं !

9788171783830
in stockINR 156
Rajkamal Prakashan
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Pratinidhi Kahaniyan : Phanishwarnath Renu

प्रेमचंद के बाद हिंदी कथा-साहित्य में रेणु उन थोड़े-से कथाकारों में अग्रगण्य हैं जिन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन का उसके सम्पूर्ण आंतरिक यथार्थ के साथ चित्रण किया है ! स्वाधीनता के बाद भारतीय गाँव ने जिस शहरी रिश्ते को बनाया और निभाना चाहा है, रेणु की नजर उससे होनेवाले सांस्कृतिक विघटन पर भी है जिसे उन्होंने गहरी तकलीफ के साथ उकेरा है ! मूल्य-स्तर पर उससे उनकी आंचलिकता अतिक्रमित हुई है और उसका एक जातीय स्वरुप उभरा है ! वस्तुतः ग्रामीण जन-जीवन के सन्दर्भ में रेणु की कहानियां अकुंठ मानवीयता, गहन रागात्मकता और अनोखी रसमयता से परिपूर्ण हैं ! यही करण है कि उनमे एक सहज सम्मोहन और पाठकीय संवेदना को परितृप्त करने की अपूर्व क्षमता है ! मानव-जीवन की पीड़ा अरु अवसाद, आनंद और उल्लास को एक कलात्मक लय-ताल सौंपना किसी रचनाकार के लिए अपने प्राणों का रस उंडेलकर ही संभव है और रेणु ऐसे ही रचनाकार हैं ! इस संग्रह में उनकी प्रायः सभी महत्त्पूर्ण कहानियाँ संकलित हैं !

AuthorPhanishwarnathRenu
LanguageHindi
PublisherRajkamal Prakashan
Isbn 139788171783830
Pages144
BindingHardcover
StockTRUE
BrandRajkamal Prakashan