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9788126702633 6422bde8d6b8b602833146a3 Pratinidhi Kavitayen : Ibne Insha https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422bde9d6b8b602833146d4/book-rajkamal-prakashan-9788126702633-19165666705574.jpg
उर्दू के सुविख्यात शायर इब्ने इंशा की प्रतिनिधि $गज़लों और नज़्मों की यह पुस्तक हिन्दी पाठकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के समान है। हिंदी में वे कबीर और निराला तथा उर्दू में मीर और नज़ीर की परंपरा को विकसित करनेवाले शायर हैं। जीवन का दर्शन और जीवन का राग उनकी रचनाओं को बिलकुल नया सौंदर्य प्रदान करता है। उर्दू शायरी के प्रचलित विन्यास को उनकी शायरी ने बड़ी हद तक हाशिए में डाल दिया है। अब्दुल बिस्मिल्लाह के शब्दों में कहें तो इंशा जी उर्दू कविता के पूरे जोगी हैं। हालाँकि रूप-सरूप, जोग-बिजोग, बिरहन, परदेशी और माया आदि का काव्य-बोध इंशा को कैसे प्राप्त हुआ, यह कहना कठिन है, फिर भी यह असंदिग्ध है कि उर्दू शायरी की केन्द्रीय अभिरुचि से यह अलग है या कहें कि यह उनका निजी तख़्य्युल है। दरअस्ल भाषा की सांस्कृतिक और रूपगत संकीर्णता से ऊपर उठकर शायरी करनेवालों की जो नई पीढ़ी पाकिस्तानी उर्दू शायरी में तेजी से उभरी है, उसकी बुनियाद में इंशा सरीखे शायर की खास भूमिका रही है।

9788126702633
in stock INR 79.2
Rajkamal Prakashan
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उर्दू के सुविख्यात शायर इब्ने इंशा की प्रतिनिधि $गज़लों और नज़्मों की यह पुस्तक हिन्दी पाठकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के समान है। हिंदी में वे कबीर और निराला तथा उर्दू में मीर और नज़ीर की परंपरा को विकसित करनेवाले शायर हैं। जीवन का दर्शन और जीवन का राग उनकी रचनाओं को बिलकुल नया सौंदर्य प्रदान करता है। उर्दू शायरी के प्रचलित विन्यास को उनकी शायरी ने बड़ी हद तक हाशिए में डाल दिया है। अब्दुल बिस्मिल्लाह के शब्दों में कहें तो इंशा जी उर्दू कविता के पूरे जोगी हैं। हालाँकि रूप-सरूप, जोग-बिजोग, बिरहन, परदेशी और माया आदि का काव्य-बोध इंशा को कैसे प्राप्त हुआ, यह कहना कठिन है, फिर भी यह असंदिग्ध है कि उर्दू शायरी की केन्द्रीय अभिरुचि से यह अलग है या कहें कि यह उनका निजी तख़्य्युल है। दरअस्ल भाषा की सांस्कृतिक और रूपगत संकीर्णता से ऊपर उठकर शायरी करनेवालों की जो नई पीढ़ी पाकिस्तानी उर्दू शायरी में तेजी से उभरी है, उसकी बुनियाद में इंशा सरीखे शायर की खास भूमिका रही है।

Author IbneInsha
Language Hindi
Publisher Rajkamal Prakashan
Isbn 13 9788126702633
Pages 140
Binding Paperback
Stock TRUE
Brand Rajkamal Prakashan