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8171194150 6422bdc0d6b8b60283313ec0 Pravasi Mazduron Ki Peeda https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422bdc1d6b8b60283313efe/book-rajkamal-prakashan-8171194150-19166662459558.jpg

मजदूरों का विस्थापन न तो अकेले भारत में हो रहा है, न आज पहली बार । सभ्यता के प्रारंभ से ही कामगारों-व्यापारियों का आवागमन चलता रहा है, लेकिन आज भूमंडलीकरण के दौर में भारत में मजदूरों को प्रवासी बनानेवाली स्थितियाँ और वजहें बिलकुल अलग किस्म की हैं । उनका स्वरूप इस कदर अलग है कि उनसे एक नए घटनाक्रम का आभास होता है । ज्ञात इतिहास में शायद ही कभी, लाखों नहीं, करोड़ों की संख्या में मजूदूर अपना घर-बार छोड्‌कर कमाने, पेट पालने और अपने आश्रितों के भरण-पोषण के लिए बाहर निकल पड़े हों ।
देश के सबसे पिछड़े राज्य बिहार और सबसे विकसित राज्य पंजाब के बीच मजदूरों की आवाजाही आज सबसे अधिक ध्यान खींच रही है । यह संख्या लाखों में है । पंजाब की अर्थव्यवस्था, वहाँ के शहरी-ग्रामीण जीवन में बिहार के 'भैया' मजदूर अनिवार्य अंग बन गए हैं और बिहार के सबसे पिछड़े इलाकों के जीवन और नए विकास की सुगबुगाहट में पंजाब की कमाई एक आधार बनती जा रही है । यह पुस्तक इसी प्रवृत्ति, इसी बदलाव, इसी प्रभाव के अध्ययन की एक कोशिश है । इस कोशिश में लेखक के साल भर गहन अध्ययन, लंबी यात्राओं और मजदूरों के साथ बिताए समय से पुस्तक आधिकारिक दस्तावेज और किसी रोचक कथा जैसी बन पड़ी है ।
पंजाब और बिहार के बीच शटल की तरह डोलते मजदूरों की जीवन शैली की टोह लेती यह कथा कभी पंजाब का नजारा पेश करती है तो कभी बिहार के धुर पिछड़े गाँवों का । शैली इतनी रोचक और मार्मिक है कि लाखों प्रवासी मजदूरों और पंजाब पर उनके असर के तमाम विवरणों का बखान करती यह कब खत्म हो जाती है, इसका पता ही नहीं चलता ।

8171194150
out of stock INR 156
Rajkamal Prakashan
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मजदूरों का विस्थापन न तो अकेले भारत में हो रहा है, न आज पहली बार । सभ्यता के प्रारंभ से ही कामगारों-व्यापारियों का आवागमन चलता रहा है, लेकिन आज भूमंडलीकरण के दौर में भारत में मजदूरों को प्रवासी बनानेवाली स्थितियाँ और वजहें बिलकुल अलग किस्म की हैं । उनका स्वरूप इस कदर अलग है कि उनसे एक नए घटनाक्रम का आभास होता है । ज्ञात इतिहास में शायद ही कभी, लाखों नहीं, करोड़ों की संख्या में मजूदूर अपना घर-बार छोड्‌कर कमाने, पेट पालने और अपने आश्रितों के भरण-पोषण के लिए बाहर निकल पड़े हों ।
देश के सबसे पिछड़े राज्य बिहार और सबसे विकसित राज्य पंजाब के बीच मजदूरों की आवाजाही आज सबसे अधिक ध्यान खींच रही है । यह संख्या लाखों में है । पंजाब की अर्थव्यवस्था, वहाँ के शहरी-ग्रामीण जीवन में बिहार के 'भैया' मजदूर अनिवार्य अंग बन गए हैं और बिहार के सबसे पिछड़े इलाकों के जीवन और नए विकास की सुगबुगाहट में पंजाब की कमाई एक आधार बनती जा रही है । यह पुस्तक इसी प्रवृत्ति, इसी बदलाव, इसी प्रभाव के अध्ययन की एक कोशिश है । इस कोशिश में लेखक के साल भर गहन अध्ययन, लंबी यात्राओं और मजदूरों के साथ बिताए समय से पुस्तक आधिकारिक दस्तावेज और किसी रोचक कथा जैसी बन पड़ी है ।
पंजाब और बिहार के बीच शटल की तरह डोलते मजदूरों की जीवन शैली की टोह लेती यह कथा कभी पंजाब का नजारा पेश करती है तो कभी बिहार के धुर पिछड़े गाँवों का । शैली इतनी रोचक और मार्मिक है कि लाखों प्रवासी मजदूरों और पंजाब पर उनके असर के तमाम विवरणों का बखान करती यह कब खत्म हो जाती है, इसका पता ही नहीं चलता ।

Author ArvindMohan
Language Hindi
Publisher Radhakrishna Prakashan
Isbn 13 8171194150
Pages 171
Binding Hardcover
Brand Rajkamal Prakashan