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9789388211826 6422bcf1d6b8b60283311433 Sahitya Samaj Aur Jivan https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422bcf3d6b8b60283311474/book-rajkamal-prakashan-9789388211826-39598302200003.jpg
‘साहित्य, समाज और जीवन’ रविनंदन सिह का दूसरा निबंध-संग्रह है। इसमें अधिकतर निबंध साहित्यिक है । लगभग एक दर्जन निबंध समाज के विविध पहलुओं तथा सामाजिक विसंगतियों पर केंद्रित हैं। कुछ निबंध मनुष्य की जीवन शैली तथा जीवन दर्शन से संबंधित है । रविनंदन सिह जब कोई विषय चुनते है तो उस विषय की गहन पड़ताल करते है एवं उस विषय की परतों को खोलकर रख देते है । वे विषय का विश्लेषण तथा मूल्यांकन बिना किसी आग्रह के, निरपेक्ष होकर करते है । उनके निबंधों को पढ़ने से उस विषय की तस्वीर बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है । वे विषय को उलझाते नहीं बल्कि उलझे हुए विषय को भी सुलझाकर प्रस्तुत करते हैं। उनके निबंधों की भाषा सरल, सहज एवं प्रवाहपूर्ण हैँ। उनके निबंध अत्यंत सारगर्भित एवं बोधगम्य है । भाषा एवं संवेदना से समृद्ध इन निबंधों से गुजरना एक रोचक अनुभव की तरह है। स्नातक, स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों एवं शोध छात्रों के लिए ये निबंध अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे ।.

9789388211826
out of stock INR 156
Rajkamal Prakashan
1 1
Sahitya Samaj Aur Jivan

‘साहित्य, समाज और जीवन’ रविनंदन सिह का दूसरा निबंध-संग्रह है। इसमें अधिकतर निबंध साहित्यिक है । लगभग एक दर्जन निबंध समाज के विविध पहलुओं तथा सामाजिक विसंगतियों पर केंद्रित हैं। कुछ निबंध मनुष्य की जीवन शैली तथा जीवन दर्शन से संबंधित है । रविनंदन सिह जब कोई विषय चुनते है तो उस विषय की गहन पड़ताल करते है एवं उस विषय की परतों को खोलकर रख देते है । वे विषय का विश्लेषण तथा मूल्यांकन बिना किसी आग्रह के, निरपेक्ष होकर करते है । उनके निबंधों को पढ़ने से उस विषय की तस्वीर बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है । वे विषय को उलझाते नहीं बल्कि उलझे हुए विषय को भी सुलझाकर प्रस्तुत करते हैं। उनके निबंधों की भाषा सरल, सहज एवं प्रवाहपूर्ण हैँ। उनके निबंध अत्यंत सारगर्भित एवं बोधगम्य है । भाषा एवं संवेदना से समृद्ध इन निबंधों से गुजरना एक रोचक अनुभव की तरह है। स्नातक, स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों एवं शोध छात्रों के लिए ये निबंध अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे ।.

AuthorRavi Nandan Singh
LanguageHindi
PublisherLokbharti Prakashan
Isbn 139789388211826
Pages240
BindingPaperback
BrandRajkamal Prakashan