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Bookish Santa
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9789390625369 6422bdb7d6b8b60283313cc1 Vayam Rakshamah https://www.bookishsanta.com/s/63fe03d26a1181c480898883/6422bdb8d6b8b60283313cec/book-rajkamal-prakashan-9789390625369-39599105671363.jpg
वयं रक्षाम: प्रागैतिहासिक अतीत की कृति है। इसके कथानक के मूलाधार राक्षसराज रावण तथा महापुरुष राम हैं। ‘‘इस उपन्यास में प्राग्वेदकालीन नर, नाग, देव, दैत्य-दानव, आर्य, अनार्य आदि विविध नृवंशों के जीवन के वे विस्मृत-पुरातन रेखाचित्र हैं, जिन्हें धर्म के रंगीन शीशे में देखकर सारे संसार ने अन्तरिक्ष का देवता मान लिया था। मैं इस उपन्यास में उन्हें नर-रूप में आपके समक्ष उपस्थित करने का साहस कर रहा हूँ। आज तक कभी मनुष्य की वाणी से न सुनी गयी बातें, मैं आपको सुनाने पर आमादा हूँ।. उपन्यास में मेरे अपने जीवन-भर के अध्ययन का सार है. ’’ आचार्य चतुरसेन शास्त्री
9789390625369
in stockINR 260
Rajkamal Prakashan
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Vayam Rakshamah

वयं रक्षाम: प्रागैतिहासिक अतीत की कृति है। इसके कथानक के मूलाधार राक्षसराज रावण तथा महापुरुष राम हैं। ‘‘इस उपन्यास में प्राग्वेदकालीन नर, नाग, देव, दैत्य-दानव, आर्य, अनार्य आदि विविध नृवंशों के जीवन के वे विस्मृत-पुरातन रेखाचित्र हैं, जिन्हें धर्म के रंगीन शीशे में देखकर सारे संसार ने अन्तरिक्ष का देवता मान लिया था। मैं इस उपन्यास में उन्हें नर-रूप में आपके समक्ष उपस्थित करने का साहस कर रहा हूँ। आज तक कभी मनुष्य की वाणी से न सुनी गयी बातें, मैं आपको सुनाने पर आमादा हूँ।. उपन्यास में मेरे अपने जीवन-भर के अध्ययन का सार है. ’’ आचार्य चतुरसेन शास्त्री
AuthorChatur Sen Shastri
LanguageHindi
PublisherLokbharti Prakashan
Isbn 139789390625369
BindingPaperback
StockTRUE
BrandRajkamal Prakashan