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Bismillah Khan: Banaras Ke Ustad (Bismillah Khan: The Maestro From Benaras) (Bahuvachan)


by Akshay Kumar (Translator) by Juhi Sinha
Original price Rs. 795.00
Current price Rs. 596.25

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“बिस्मिल्लाह ख़ान - बनारस के उस्ताद» वह किताब है जो पाठकों को भारत के सबसे महान कलाकारों में से एक के दिल और घर-परिवार ही नहीं उनके ख़्याल और मौसीकी से भी रू-ब-रू करती है। यह डुमरांव जैसे छोटे क़स्बे से बनारस और फिर दुनिया तक के सफ़र को बयां करती है। यह किताब बिस्मिल्लाह ख़ान के बचपन से लेकर बड़े होने तक, शागिर्द से उस्ताद, शिष्य से दिग्गज बनने तक या शुरुआती दिनों में एक कार्यक्रम का मेहनताना पांच रुपये से हर पेशकश के लिए पांच से दस लाख रुपये के बीच कुछ भी लेने तक उनकी पूरी कहानी बताती है। बिस्मिल्लाह ख़ान की ज़िन्दगी बनारस की सड़कों, गलियों और मुहल्लों, इसके घाटों, मंदिरों, महफ़िल और साज़िन्दों के आसपास घूमती है, जो इसको उनके साथ गुज़रा हुआ एक युग बना देती है। लेखिका ने बखूबी बीसवीं सदी के बनारस में इसके क़िरदार और अंदाज़ को तरोताज़ा कर दिया है। इस किताब के लिए रईस रजवाड़ों, गणिकाओं और कई कलाकारों से बातचीत की गई। बिस्मिल्लाह ख़ान की असाधारण प्रतिभा के लिए बनारसी समाज के रंगीन ताने-बाने को एकदम सही पृष्ठभूमि के रूप में देखा गया। यह किताब बिस्मिल्लाह ख़ान की सनकी मिज़ाज और कमजोरियों को भी उसी ख़ूबसूरती से बताती है- मौसीकी के दिग्गज इस कलाकार का कद उसकी हाज़िरजवाबी, दिल्लगी और करिश्मे को कभी भी छिपा नहीं सकता हैं। “Bismillah Khan – maestro from benaras” is a book that gives the reader an insightful look into the home and heart, muse and music of one of the greatest artists that India has produced. It traces his journey from the small town of dumraon to Banaras and Thence to the world. The book follows Bismillah Khan as he grows from child to man, shagird to Ustad, pupil to legend-from his early days when he charged five rupees for a programme to the days when each performance commanded anything between five to ten lakh rupees. Bismillah Khan’s life is played out against the streets, galis and Muhammad of Banaras, its Ghats, temples, mehfils and musicians, bringing to life an era that has since passed. The author recreates in delightful detail the moves and manners of twentieth century benaras, its wealthy
Aristocrats and courtesans and the many artists who interacted with both. The colourful strands of Benares society are seen as the perfect background for the extraordinary genius of Bismillah Khan. The book also lovingly portrays the whims and foibles of Bismillah khan—an artist, whose stature as a musical legend could never quite overshadow the wit, humour and charisma of the man.


Publisher: Niyogi Books Private Limited
Language: Hindi
Binding: Hardcover

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